मित्र पुलिस’ का काला चेहरा: परिवार का झगड़ा सुलझाने गए डायल 112 के जवानों ने युवक को उठाकर सुनसान जगह पर कूटा, वर्दी पर उठे गंभीर सवाल
मित्र पुलिस’ का काला चेहरा: परिवार का झगड़ा सुलझाने गए डायल 112 के जवानों ने युवक को उठाकर सुनसान जगह पर कूटा, वर्दी पर उठे गंभीर सवाल
राजापुर (चित्रकूट)। उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए ‘मित्र पुलिसिंग’ का नारा उस समय एक क्रूर मजाक में बदल गया, जब डायल 112 (पीआरबी 112) के सिपाहियों ने अपनी वर्दी की गरिमा को तार-तार कर दिया। राजापुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बामहेत में मामूली पति-पत्नी के विवाद को सुलझाने पहुंची पुलिस ने एक नहीं, बल्कि मानवता की हर सीमा को तोड़ दिया। सिपाहियों पर आरोप है कि उन्होंने एक युवक को थाने ले जाने के बहाने गाड़ी में बैठाकर सुनसान जगह पर बेरहमी से पीटा और अधमरी हालत में परिजनों को सौंप दिया।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरी चित्रकूट पुलिस प्रशासन के चरित्र पर एक धब्बा है। सवाल सिर्फ चार-पाँच सिपाहियों की करतूत पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर उठता है, जो अपने ही लोगों को कानून का रक्षक से कातिल बनने की खुली छूट देता नजर आता है।
कैसे खत्म हुआ ‘रक्षक’ पर भरोसा
जानकारी के मुताबिक, बामहेत गांव में एक घर में पति-पत्नी के बीच मामूली कहासुनी हुई। मामला इतना छोटा था कि परिवार के लोगों ने खुद शांति बनाए रखने के लिए डायल 112 पर फोन किया। वे चाहते थे कि पुलिस आए, समझाए-बुझाए और मामला शांत हो जाए। लेकिन वहाँ पहुँचे पीआरबी कर्मियों ने जो किया, वह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं। परिजनों का आरोप है कि सिपाहियों ने युवक से कहा कि उसे थाने ले जाया जा रहा है और उसे गाड़ी में बिठा लिया। इसके बाद युवक को थाने की बजाय एक सुनसान रास्ते पर ले जाकर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उसके शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं।
परिवार का कहना है कि जब युवक बेहोशी की हालत में था, तब उसे लाकर घर के सामने इस तरह पटका गया मानो कोई सामान हो। घायल युवक को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) राजापुर ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
इस दरिंदगी का एक भयावह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में युवक के शरीर पर गहरे नीले-काले निशान साफ देखे जा सकते हैं, जो बताते हैं कि पिटाई बेहद क्रूर और जानबूझकर की गई। यह वीडियो किसी जख्मी देह का नहीं, बल्कि पूरी पुलिस प्रणाली के चरित्र का आईना है।
जब अस्पताल में भी मिला पुलिस का साया
पीड़ित परिवार ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वे खून से लथपथ युवक को सीएचसी लेकर पहुंचे, तो वहाँ के डॉक्टरों ने भी मरीज के साथ दुर्व्यवहार किया। परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने इलाज पर ध्यान देने की बजाय पीड़ित पक्ष को ही धमकाने और पुलिसिया कार्रवाई का पक्ष लेना शुरू कर दिया। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जिले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच कोई ऐसा गठजोड़ है, जो पीड़ितों को उनका हक और इंसाफ पाने से रोकता है?
गुस्से से उबलता गांव, एसपी के लिए परीक्षा की घड़ी
इस अमानवीय घटना के बाद बामहेत गांव ही नहीं, बल्कि पूरे राजापुर इलाके में जनता का आक्रोश फूट पड़ा है। स्थानीय लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब ‘रक्षक’ ही ‘भक्षक’ बन जाए, तो आम आदमी किसके पास जाए? उनका आरोप है कि चित्रकूट पुलिस महज खानापूर्ति के लिए ‘मित्र पुलिसिंग’ का ढोंग कर रही है, जबकि हकीकत में पुलिस जनता की दोस्त नहीं, बल्कि दुश्मन बन चुकी है।
अब सबकी निगाहें चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर टिकी हैं। यह घड़ी सिर्फ दोषी सिपाहियों को सजा दिलाने की नहीं है, बल्कि पूरे पुलिस प्रशासन के उस चरित्र पर फैसला सुनाने की है, जहाँ एक पूरा थाना यह मानकर चलता है कि वर्दी की ताकत के आगे किसी की नहीं चलेगी। क्या एसपी सिर्फ एक बयान जारी कर चुप बैठ जाएँगे, या अपने विभाग के दागियों पर ऐसी नकेल कसेंगे कि किसी और सिपाही की हिम्मत किसी मासूम पर हाथ उठाने की न हो? पूरे जिले को एक मिसाल की दरकार है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वह दिन दूर नहीं जब ‘पुलिस’ शब्द सुनते ही लोगों के दिलों में दहशत और नफरत के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरी चित्रकूट पुलिस प्रशासन के चरित्र पर एक धब्बा है। सवाल सिर्फ चार-पाँच सिपाहियों की करतूत पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर उठता है, जो अपने ही लोगों को कानून का रक्षक से कातिल बनने की खुली छूट देता नजर आता है।
कैसे खत्म हुआ ‘रक्षक’ पर भरोसा
जानकारी के मुताबिक, बामहेत गांव में एक घर में पति-पत्नी के बीच मामूली कहासुनी हुई। मामला इतना छोटा था कि परिवार के लोगों ने खुद शांति बनाए रखने के लिए डायल 112 पर फोन किया। वे चाहते थे कि पुलिस आए, समझाए-बुझाए और मामला शांत हो जाए। लेकिन वहाँ पहुँचे पीआरबी कर्मियों ने जो किया, वह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं। परिजनों का आरोप है कि सिपाहियों ने युवक से कहा कि उसे थाने ले जाया जा रहा है और उसे गाड़ी में बिठा लिया। इसके बाद युवक को थाने की बजाय एक सुनसान रास्ते पर ले जाकर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उसके शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं।
परिवार का कहना है कि जब युवक बेहोशी की हालत में था, तब उसे लाकर घर के सामने इस तरह पटका गया मानो कोई सामान हो। घायल युवक को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) राजापुर ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
इस दरिंदगी का एक भयावह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में युवक के शरीर पर गहरे नीले-काले निशान साफ देखे जा सकते हैं, जो बताते हैं कि पिटाई बेहद क्रूर और जानबूझकर की गई। यह वीडियो किसी जख्मी देह का नहीं, बल्कि पूरी पुलिस प्रणाली के चरित्र का आईना है।
जब अस्पताल में भी मिला पुलिस का साया
पीड़ित परिवार ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वे खून से लथपथ युवक को सीएचसी लेकर पहुंचे, तो वहाँ के डॉक्टरों ने भी मरीज के साथ दुर्व्यवहार किया। परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने इलाज पर ध्यान देने की बजाय पीड़ित पक्ष को ही धमकाने और पुलिसिया कार्रवाई का पक्ष लेना शुरू कर दिया। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जिले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच कोई ऐसा गठजोड़ है, जो पीड़ितों को उनका हक और इंसाफ पाने से रोकता है?
गुस्से से उबलता गांव, एसपी के लिए परीक्षा की घड़ी
इस अमानवीय घटना के बाद बामहेत गांव ही नहीं, बल्कि पूरे राजापुर इलाके में जनता का आक्रोश फूट पड़ा है। स्थानीय लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब ‘रक्षक’ ही ‘भक्षक’ बन जाए, तो आम आदमी किसके पास जाए? उनका आरोप है कि चित्रकूट पुलिस महज खानापूर्ति के लिए ‘मित्र पुलिसिंग’ का ढोंग कर रही है, जबकि हकीकत में पुलिस जनता की दोस्त नहीं, बल्कि दुश्मन बन चुकी है।
अब सबकी निगाहें चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर टिकी हैं। यह घड़ी सिर्फ दोषी सिपाहियों को सजा दिलाने की नहीं है, बल्कि पूरे पुलिस प्रशासन के उस चरित्र पर फैसला सुनाने की है, जहाँ एक पूरा थाना यह मानकर चलता है कि वर्दी की ताकत के आगे किसी की नहीं चलेगी। क्या एसपी सिर्फ एक बयान जारी कर चुप बैठ जाएँगे, या अपने विभाग के दागियों पर ऐसी नकेल कसेंगे कि किसी और सिपाही की हिम्मत किसी मासूम पर हाथ उठाने की न हो? पूरे जिले को एक मिसाल की दरकार है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वह दिन दूर नहीं जब ‘पुलिस’ शब्द सुनते ही लोगों के दिलों में दहशत और नफरत के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
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चित्रकूट : यमुना किनारे खनन के गड्ढे ने ली एक मासूम की जान!Jun 12, 2026 92 -
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