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जोड़ों का दर्द, टूटते बाल और हड्डियों की कमज़ोरी — अगर ये लक्षण दिखें तो समझ जाइए शरीर में 'सनशाइन विटामिन' की भारी कमी है

जोड़ों का दर्द, टूटते बाल और हड्डियों की कमज़ोरी — अगर ये लक्षण दिखें तो समझ जाइए शरीर में 'सनशाइन विटामिन' की भारी कमी है

जोड़ों का दर्द, टूटते बाल और हड्डियों की कमज़ोरी — अगर ये लक्षण दिखें तो समझ जाइए शरीर में 'सनशाइन विटामिन' की भारी कमी है

पिछले रविवार मेरी मुलाकात लखनऊ के एक बुज़ुर्ग दंपत्ति से हुई। पति जी बोले — "भाईसाहब, सुबह-सुबह चारपाई से उठते ही घुटनों में ऐसा दर्द होता है जैसे किसी ने पेच कस दिया हो। डॉक्टर को दिखाया तो बोले — Vitamin D की कमी है।" मैंने पूछा — दिन में धूप में बैठते हैं? जवाब मिला — "धूप? हम तो दिनभर कमरे में AC चलाकर बैठे रहते हैं।"

ये कहानी सिर्फ उस बुज़ुर्ग दंपत्ति की नहीं है। भारत में 10 में से लगभग 7-8 लोगों के शरीर में Vitamin D की मात्रा ज़रूरत से कम है। ये उतना ही गंभीर मसला है जितना कि खून की कमी या थायरॉइड। और सबसे बड़ी वजह है — धूप से दूरी और गलत खानपान।

तो आज की इस हेल्थ रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि ये 'सनशाइन विटामिन' आखिर है क्या, शरीर के लिए क्यों इतना ज़रूरी है, और इसकी कमी को दूर करने के लिए बिना दवाई खाए क्या-क्या किया जा सकता है।


Vitamin D है क्या चीज़?

दरअसल, Vitamin D कोई आम विटामिन नहीं, बल्कि एक खास किस्म का हार्मोन है जो हमारी त्वचा में सूरज की रोशनी से बनता है। यही वजह है कि इसे 'सनशाइन विटामिन' भी कहते हैं। ये शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के संतुलन को बनाए रखने का काम करता है — मतलब हड्डियों और दाँतों की मज़बूती की पूरी ज़िम्मेदारी इसी के कंधों पर है।

इसके दो मुख्य रूप होते हैं — Vitamin D2 (Ergocalciferol) और Vitamin D3 (Cholecalciferol)। D2 कुछ खास पौधों और सप्लीमेंट्स से मिलता है, जबकि D3 वो है जो सूरज की UVB किरणों से त्वचा में बनता है और कुछ जानवरों से मिलने वाले आहार में पाया जाता है। दोनों में D3 ज़्यादा असरदार माना जाता है।


भारत जैसे देश में इतनी कमी क्यों?

ये सुनने में अजीब लगता है कि जिस देश में साल के 300 दिन तेज़ धूप रहती है, वहाँ लोगों में धूप वाले विटामिन की सबसे ज़्यादा कमी हो। लेकिन हकीकत यही है। इसकी तीन बड़ी वजहें हैं:

  1. घर से ऑफिस और ऑफिस से घर: सुबह 9 से शाम 6 बजे तक AC बिल्डिंग में बंद। धूप का शरीर तक पहुँचना मुश्किल।
  2. सनस्क्रीन और पूरे कपड़े: UV किरणों से बचने की सलाह ने विटामिन D बनने की प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया है।
  3. खाने में कमी: शाकाहारी खाने में Vitamin D के प्राकृतिक स्रोत बहुत सीमित हैं।

खासकर उत्तर भारत में सर्दियों में और बरसात के मौसम में तो स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि धूप कमज़ोर पड़ जाती है और हमारी त्वचा पर्याप्त मात्रा में विटामिन D नहीं बना पाती।


शरीर देता है ये 5 संकेत

Vitamin D की कमी होने पर शरीर चुपचाप कुछ इशारे करता रहता है। लेकिन हम अक्सर उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ये रहे वो पाँच बड़े लक्षण:

  • हड्डियों और जोड़ों में हर वक्त दर्द: खासकर पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों और घुटनों में।
  • हर वक्त थकान और कमज़ोरी: पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर टूटा-टूटा लगना।
  • बालों का झड़ना: महिलाओं में ये लक्षण बहुत आम है और लोग इसे सिर्फ स्ट्रेस या आयरन की कमी समझ बैठते हैं।
  • बार-बार बीमार पड़ना: सर्दी-खाँसी, वायरल बुखार — इम्यून सिस्टम की घंटी बज रही होती है।
  • मूड स्विंग और डिप्रेशन: सर्दियों में उदासी का एक बड़ा कारण विटामिन D की कमी को भी माना जाता है।

कितनी धूप काफी है?

डॉक्टरों की मानें तो हफ्ते में कम से कम 3-4 दिन, 20-30 मिनट की तेज़ धूप शरीर को लगनी चाहिए। और इसके लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच का समय सबसे अच्छा है। कोशिश करें कि शरीर का कम से कम 40% हिस्सा (हाथ, पैर, पीठ) सीधी धूप में खुला रहे।

बस एक बात का ध्यान रखें — जब धूप बहुत तेज़ हो और त्वचा लाल पड़ने लगे तो छाँव में आ जाएँ। विटामिन D बनने में 15-20 मिनट लगते हैं, जलने की ज़रूरत नहीं।


खाने में क्या लें?

आहार प्रकार टिप्पणी
सैल्मन, टूना, मैकेरल मछली नॉन-वेज Vitamin D का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत।
अंडे की ज़र्दी नॉन-वेज रोज़ एक अंडा — ये आसान उपाय है।
दूध, दही, पनीर डेयरी बाज़ार में Vitamin D से फोर्टिफाइड दूध भी उपलब्ध है।
मशरूम (धूप में उगाए गए) शाकाहारी शाकाहारी लोगों के लिए रामबाण — बस धूप में रखे हुए मशरूम खाएँ।
फोर्टिफाइड अनाज और सोया मिल्क शाकाहारी पैकेट पर 'Fortified with Vitamin D' लिखा हो तो ज़रूर खरीदें।

क्या सप्लीमेंट्स लेना सही है?

ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। मेरी सलाह है — पहले ब्लड टेस्ट करवाइए। अगर रिपोर्ट में 20 ng/ml से कम है तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिया जा सकता है। लेकिन अपनी मर्ज़ी से खाना शुरू मत कीजिए। Vitamin D एक फैट-सॉल्युबल विटामिन है — शरीर में जमा हो सकता है। ओवरडोज़ से किडनी और लीवर पर बुरा असर पड़ सकता है।

भारत सरकार भी स्कूली बच्चों और गर्भवती महिलाओं को Vitamin D और कैल्शियम की खुराक देने के लिए कई राज्यों में विशेष अभियान चला रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में ये बहुत कारगर साबित हो रहा है।


नवीनतम अपडेट: क्या कहता है नया शोध?

हाल ही में AIIMS दिल्ली के एक अध्ययन में सामने आया कि Vitamin D की पर्याप्त मात्रा सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और कुछ प्रकार के कैंसर से बचाव में भी मददगार हो सकती है। एक और दिलचस्प रिसर्च सामने आई है जिसमें कहा गया कि कोरोना संक्रमण के दौरान जिन मरीज़ों के शरीर में Vitamin D का स्तर अच्छा था, उनमें गंभीर लक्षणों का खतरा कम देखा गया।

इसके अलावा, 'फोर्टिफिकेशन' यानी खाद्य पदार्थों में Vitamin D मिलाने का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है। दूध, तेल और आटे में Vitamin D मिलाकर बेचा जा रहा है ताकि लोगों को बिना अतिरिक्त मेहनत के ये ज़रूरी तत्व मिल सके।


परीक्षार्थियों के लिए (Exam Corner)

SSC और UPPSC में ये तीन सवाल बार-बार पूछे जाते हैं। रट लीजिए:

  • सवाल: Vitamin D का रासायनिक नाम क्या है?
    जवाब: कैल्सिफेरॉल (Calciferol) — खासकर D3 को कोलेकैल्सिफेरॉल कहते हैं।
  • सवाल: Vitamin D की कमी से कौन सी बीमारी होती है?
    जवाब: बच्चों में रिकेट्स (Rickets) और बड़ों में ऑस्टियोमलेशिया (Osteomalacia) — यानी हड्डियों का कमज़ोर होना।
  • सवाल: Vitamin D को 'सनशाइन विटामिन' क्यों कहते हैं?
    जवाब: क्योंकि यह सूर्य के प्रकाश की UVB किरणों के संपर्क में आने पर त्वचा में बनता है।
  • सवाल (बोनस): रिकेट्स रोग में शरीर का कौन सा अंग सबसे ज़्यादा प्रभावित होता है?
    जवाब: हड्डियाँ — विशेषकर पैरों की हड्डियाँ टेढ़ी हो जाती हैं।

नोट: ये लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। कोई भी सप्लीमेंट या दवा शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। हर किसी का शरीर अलग है, इसलिए जो दवा किसी और को सूट करती है, ज़रूरी नहीं कि आपको भी करे।

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दैनिक धमाका पत्रिका ब्यूरो
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Chitrakoot, Uttar Pradesh

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