कंस के अंत से धर्म की विजय रुक्मणी हरण से प्रेम का अमर संदेश संदेश
कंस के अंत से धर्म की विजय रुक्मणी हरण से प्रेम का अमर संदेश संदेश
कंस के अंत से धर्म की विजय, रुक्मिणी हरण से प्रेम का अमर संदेश।
जसवंतनगर/इटावा। बलरई स्थित प्रसिद्ध चिंताहरण धाम कारसदेव खाटूश्याम मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिवस पर पूरा परिसर श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथाव्यास निशांत कृष्ण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अत्याचारी राजा कंस के वध और रुक्मिणी विवाह के दिव्य प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथाव्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया। वहीं रुक्मिणी हरण और विवाह का प्रसंग सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और भक्ति की सर्वोच्च मिसाल है। उन्होंने कहा कि जब भक्त का समर्पण पूर्ण होता है तो भगवान स्वयं उसके जीवन की बाधाओं को दूर कर उसका कल्याण करते हैं। कथा में राजा परीक्षित की भूमिका मंदिर के महंत सुनील महाराज एवं उनकी धर्मपत्नी सोनी देवी निभा रहे हैं, जबकि यज्ञपति के रूप में सुरेश डीलर एवं उनकी धर्मपत्नी सीता देवी विराजमान हैं। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भजन-कीर्तन के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा।
आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीमद्भागवत महापुराण के अन्य दिव्य प्रसंगों का रसपान कराते हुए कथा का समापन भव्य धार्मिक आयोजनों के साथ किया जाएगा।
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